विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया का बुधवार को निधन हो गया है. रामजन्म भूमि आन्दोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार रहे डालमिया का 91 साल के थे. उन्होंने बुधवार सुबह अंतिम सांस ली. विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ सलाहकार विष्णुहरि डालमिया का लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे.विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेताओं अशोक सिंहल और गिरिराज किशोर के साथ डालमिया ने राम जन्मभूमि आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी.
VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि डालमिया का पार्थिव शरीर बुधवार शाम 3 बजे तक उनके नई दिल्ली स्थित निवास 18 गोल्फ लिंक पर रखा जाएगा. इसके बाद 04:30 बजे दिल्ली के निगमबोध घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. डालमिया साल 1979 में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े थे और इसके उपाध्यक्ष और कार्याध्यक्ष के बाद साल 2005 तक अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे.
इसके अलावा श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के तहत श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से जुड़े सभी मंदिरों का प्रबंधन संभालने वाले श्रीकृष्ण सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि विष्णु हरि डालमिया को 22 दिसम्बर की सुबह अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनको गंभीर हालत की वजह से आईसीयू में रखा गया.' अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक डालमिया को ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण फेफड़ों से कफ निकालने में अक्षमता जैसी गंभीर समस्याएं थीं. आपको बता दें कि डालमिया श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के लंबे समय तक मैनेजिंग ट्रस्टी रहे हैं.
श्रीकृष्ण सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया, ' डालमिया को उनकी इच्छा के अनुसार 14 जनवरी को उनके गोल्फ लिंक रोड स्थित आवास पर ले आया गया था. इसके बाद डॉक्टरों ने वहीं पर आईसीयू बना दिया था और उनका इलाज कर रहे थे. हालांकि आज बुधवार सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर सांस संबंधी दिक्कतों के चलते उनका निधन हो गया.'
आपको बता दें कि 91 साल विष्णु हरि डालमिया अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा 90 के दशक में चलाए गए राम मंदिर आन्दोलन के अगुआ नेता थे. 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी ढांचा ढहाए जाने के मामले में उनको भी सह-अभियुक्त बनाया गया था.
वित्त मंत्रालय के ट्विटर हैंडल पर मंगलवार से शुरू की गई इस सीरीज में पहली जानकारी आम बजट और वोट ऑन अकाउंट यानि लेखानुदान की जानकारी दी गई थी. मंत्रालय ने आम बजट के बारे में बताया है कि बजट केंद्र सरकार के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की जानकारी देने वाली सबसे विस्तृत रिपोर्ट है. इसमें सरकार को सभी सोर्सेज से प्राप्त होने वाले रेवेन्यू और विभिन्न गतिविधियों के लिए आवंटित खर्चे की जानकारी होती है. बजट में सरकार के अगले फाइनेंशियल ईयर के इनकम और खर्चे के अनुमान भी दिये जाते हैं जिन्हें बजट अनुमान कहा जाता है.
वहीं इस सीरीज में लेखानुदान के बारे में जानकारी देते हुये कहा गया है कि यह संसद की ओर से अगले फाइनेंशियल ईयर के एक हिस्से में किए जाने वाले खर्च की एडवांस अनुमति देता है. इसके अलावा वित्त मंत्रालय के ट्वीटर पर बुधवार को रेवेन्यू और आउटकम बजट के बारे में जानकारी दी गई. बता दें कि अगले कुछ महीने में आम चुनाव होने वाले हैं इसलिये इस बार अंतरिम बजट ही पेश किया जायेगा. चुनाव होने के बाद नई सरकार ही अंतिम बजट पेश करेगी.
मायावती का कहना था कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि बीजेपी उन्हें घर न सके. हालांकि अखिलेश यादव और मायावती ने लिखे हुए भाषण पढ़े. इससे इतना तय है कि दोनों ने एक-दूसरे के भाषण भी देखे होंगे. लेकिन अखिलेश ने मायावती को रिसीव किया, उन्हें पहले बोलने का मौका दिया. राजनीतिक समीक्षकों के मुताबिक इससे ऐसा लग रहा था कि मायावती गठबंधन में बड़ी भूमिका में हैं. मायावती खुद भी इस गठबंधन की नेता के तौर पर अपने को आगे रख रही हैं.
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