Thursday, January 24, 2019

अमेरिका में अरुण जेटली का हुआ ऑपरेशन, डॉक्टरों ने दी 2 हफ्ते आराम की सलाह

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का मंगलवार को अमेरिका के न्यूयॉर्क में ऑपरेशन हुआ है. जिसके बाद जेटली को दो हफ्ते आराम की सलाह दी गई है. तब तक के लिए अरुण जेटली से वित्त मंत्रालय का जिम्मा ले लिया गया है और रेल मंत्री पीयूष गोयल को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि पीयूष गोयल ही मोदी सरकार के कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करेंगे.

66 वर्षीय अरुण जेटली 13 जनवरी को अमेरिका गए थे. सूत्रों ने कहा कि इस सप्ताह ही उनकी ‘सॉफ्ट टिश्यू’ कैंसर के लिए जांच की गई थी. हालांकि, इस दौरान भी जेटली सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे. फेसबुक पर पोस्ट लिखने के अलावा उन्होंने मौजूदा मुद्दों पर ट्वीट भी किए.

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल 14 मई को जेटली का एम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ था, उसके बाद से वह विदेश नहीं गए थे. इसी महीने अरुण जेटली को आगामी आम चुनाव के लिए भाजपा का प्रचार प्रमुख बनाया गया था.

बिना पोर्टफोलियो के मंत्री होंगे अरुण जेटली

इस दौरान अरुण जेटली मंत्री पद पर बरकरार रहेंगे, लेकिन उनके पास कोई पोर्टफोलियो नहीं होगा. बता दें कि इससे पहले भी जब अरुण जेटली अस्पताल में भर्ती थे, तब भी पीयूष गोयल ने ही वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था.

अरुण जेटली पिछले साल गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद 23 अगस्त को काम पर लौट आए थे और उन्होंने वित्त और कॉरपोरेट मंत्रालयों की जिम्मेदारी फिर संभाल ली थी.

आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से जेटली के पास वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी है. 14 मई, 2018 से 23 अगस्त, 2018 तक वह बिना पोर्टफोलियो के मंत्री रह चुके हैं. अरुण जेटली इसके अलावा रक्षा मंत्रालय, कॉरपोरेट मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

बीजेपी के कई दिग्गज हैं बीमार

आपको बता दें कि सिर्फ अरुण जेटली ही नहीं बीजेपी में कई ऐसे नेता हैं जो इस समय बीमार चल रहे हैं. अरुण जेटली से पहले गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर काफी लंबे समय के लिए अमेरिका में इलाज करा चुके हैं, हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी स्वाइन फ्लू हो गया था. इससे पहले  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी अपना इलाज करा चुकी हैं, हालांकि पिछले काफी समय से वह अपनी जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

Wednesday, January 16, 2019

विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया का निधन

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया का बुधवार को निधन हो गया है. रामजन्म भूमि आन्दोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार रहे डालमिया का 91 साल के थे. उन्होंने बुधवार सुबह अंतिम सांस ली. विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ सलाहकार विष्णुहरि डालमिया का लंबे  समय से बीमारी से जूझ रहे थे.विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेताओं अशोक सिंहल और गिरिराज किशोर के साथ डालमिया ने राम जन्मभूमि आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी.

VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि डालमिया का पार्थिव शरीर बुधवार शाम 3 बजे तक उनके नई दिल्ली स्थित निवास 18 गोल्फ लिंक पर रखा जाएगा. इसके बाद 04:30 बजे दिल्ली के निगमबोध घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. डालमिया साल 1979 में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े थे और इसके उपाध्यक्ष और कार्याध्यक्ष के बाद साल 2005 तक अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे.

इसके अलावा श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के तहत श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से जुड़े सभी मंदिरों का प्रबंधन संभालने वाले श्रीकृष्ण सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि विष्णु हरि डालमिया को 22 दिसम्बर की सुबह अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनको गंभीर हालत की वजह से आईसीयू में रखा गया.' अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक डालमिया को ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण फेफड़ों से कफ निकालने में अक्षमता जैसी गंभीर समस्याएं थीं. आपको बता दें कि डालमिया श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के लंबे समय तक मैनेजिंग ट्रस्टी रहे हैं.

श्रीकृष्ण सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया, ' डालमिया को उनकी इच्छा के अनुसार 14 जनवरी को उनके गोल्फ लिंक रोड स्थित आवास पर ले आया गया था. इसके बाद डॉक्टरों ने वहीं पर आईसीयू बना दिया था और उनका इलाज कर रहे थे. हालांकि आज बुधवार सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर सांस संबंधी दिक्कतों के चलते उनका निधन हो गया.'

आपको बता दें कि 91 साल विष्णु हरि डालमिया अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा 90 के दशक में चलाए गए राम मंदिर आन्दोलन के अगुआ नेता थे. 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी ढांचा ढहाए जाने के मामले में उनको भी सह-अभियुक्त बनाया गया था.

वित्त मंत्रालय के ट्विटर हैंडल पर मंगलवार से शुरू की गई इस सीरीज में पहली जानकारी आम बजट और वोट ऑन अकाउंट यानि लेखानुदान की जानकारी दी गई थी.  मंत्रालय ने आम बजट के बारे में बताया है कि बजट केंद्र सरकार के फाइनेंशियल ट्रांजेक्‍शन की जानकारी देने वाली सबसे विस्तृत रिपोर्ट है. इसमें सरकार को सभी सोर्सेज से प्राप्त होने वाले रेवेन्‍यू और विभिन्न गतिविधियों के लिए आवंटित खर्चे की जानकारी होती है. बजट में सरकार के अगले फाइनेंशियल ईयर के इनकम और खर्चे के अनुमान भी दिये जाते हैं जिन्हें बजट अनुमान कहा जाता है.

वहीं इस सीरीज में लेखानुदान के बारे में जानकारी देते हुये कहा गया है कि यह संसद की ओर से अगले फाइनेंशियल ईयर के एक हिस्से में किए जाने वाले खर्च की एडवांस अनुमति देता है. इसके अलावा वित्‍त मंत्रालय के ट्वीटर पर बुधवार को रेवेन्‍यू और आउटकम बजट के बारे में जानकारी दी गई.   बता दें कि अगले कुछ महीने में आम चुनाव होने वाले हैं इसलिये इस बार अंतरिम बजट ही पेश किया जायेगा. चुनाव होने के बाद नई सरकार ही अंतिम बजट पेश करेगी.

मायावती का कहना था कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि बीजेपी उन्हें घर न सके. हालांकि अखिलेश यादव और मायावती ने लिखे हुए भाषण पढ़े. इससे इतना तय है कि दोनों ने एक-दूसरे के भाषण भी देखे होंगे. लेकिन अखिलेश ने मायावती को रिसीव किया, उन्हें पहले बोलने का मौका दिया. राजनीतिक समीक्षकों के मुताबिक इससे ऐसा लग रहा था कि मायावती गठबंधन में बड़ी भूमिका में हैं. मायावती खुद भी इस गठबंधन की नेता के तौर पर अपने को आगे रख रही हैं. 

Monday, January 7, 2019

10% सर्वण आरक्षण: राजनीतिक बेचैनी का ये लक्षण ही लगता है- नज़रिया

नरेंद्र मोदी की सरकार का सामान्य वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दस प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला अगामी लोकसभा चुनाव में कामयाबी हासिल करने के इरादे से तो लिया गया है लेकिन इसके नतीजे उल्टे भी हो सकते हैं.

11 दिसंबर को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में हार के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा में जीत हासिल करने के लिए वोट बैंक का नए सिरे से पुख्ता जुगाड़ करने के लिए बाध्य कर दिया है.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को देश की आबादी के लगभग 11.5 प्रतिशत सवर्ण तबके का एकजुट समर्थन मिला था.

लेकिन पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान विभिन्न वजहों से सवर्ण मतदाताओं का आधार भारतीय जनता पार्टी से छिटका है.

सुप्रीम कोर्ट के दलित एक्ट के खिलाफ फैसले ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ी दुविधा में डाल दिया था.

क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ दो अप्रैल 2018 को जब बहुजन संगठनों ने अप्रत्याशित देशव्यापी आंदोलन किया तो नरेंद्र मोदी की सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ संसद में संविधान संशोधन लाना पड़ा.

दूसरी तरफ़, सवर्णों के जातिगत संगठनों ने नरेंद्र मोदी की सरकार के संविधान संशोधन का विरोध किया और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को हराने का ऐलान किया.

भारतीय जनता पार्टी आरक्षण के सिद्धांत के विरोध में रही है.

बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जब बहुजनों के आरक्षण के संवैधानिक सिद्धांत की समीक्षा करने पर जोर दिया था तो नतीजे के तौर पर बिहार में भारतीय जनता पार्टी को बहुजन मतों से हाथ धोना पड़ा था.

तब से भारतीय जनता पार्टी बहुजनों के लिए आरक्षण का विरोध करने के बजाय बहुजनों के आरक्षण को कई हिस्सों में बांटने की कोशिश में लगी हुई है.

पिछड़े वर्ग के आरक्षण को कई हिस्सों में बांटने के लिए पूर्व न्यायाधीश जी रोहिणी की अध्यक्षता में एक आयोग अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में लगा है.

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार भी पिछड़े वर्गों के आरक्षण को कई हिस्सों में बांटने के प्रयास में लगी है.

लेकिन दूसरी तरफ़, भारतीय जनता पार्टी उन जातियों को आरक्षण देने के धड़ाधड़ फैसले कर रही है जो संविघान के मुताबिक आरक्षण के हकदार नहीं हो सकते हैं.

इनमें महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का उदाहरण सबसे ताज़ा है. संविधान में शैक्षणिक और सामांजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में विशेष अवसर देने का प्रावधान है.

लेकिन 1978 में देश के विभिन्न राज्यों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के विरोध में होने वाले आंदोलनों से निपटने के लिए आर्थक रूप से पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने की मांग की जाती रही है.

उस दौरान जनसंघ ने, जिस नाम से भारतीय जनता पार्टी पहले जानी जाती थी, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चुनी गई सरकारें गिराने में अहम भूमिका अदा की थी.

مخضرما في صناعة الإعلام، وقد أصدر أكثر من كتاب يتضمن

وقد عَمَد كافيت إلى محاورة ضيوفه والانخراط في نقاشات صريحة معهم، بطئيس الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع الأمريكي، مايك بنس، بزيارة مست...