लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसे में हर पार्टी अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रही है. भारतीय जनता पार्टी भी शनिवार को अपनी लिस्ट जारी कर सकती है. भारतीय जनता पार्टी अपनी पहली लिस्ट में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट का ऐलान कर सकती है. 2014 में पीएम मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ा था और प्रधानमंत्री के पद पर सवार हुए थे.
शनिवार शाम चार बजे भारतीय जनता पार्टी की बड़ी बैठक होगी. बीजेपी केंद्रीय चुनाव आयोग समिति की होने वाली इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय जनता पार्टी शनिवार को ही 100 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर सकती है.
बताया जा रहा है कि इस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा, राधामोहन सिंह की सीटों का ऐलान हो सकता है.
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी वाराणसी से सांसद हैं, बीते दिनों ऐसी अटकलें थीं कि वह ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं.
हालांकि, किसी तरह की पुष्टि नहीं हो पाई थी. 2014 में प्रधानमंत्री ने वाराणसी के अलावा गुजरात के वडोदरा से भी चुनाव लड़ा था और दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, बाद में उन्होंने वडोदरा सीट को छोड़ दिया था.
11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 91 सीट पर चुनाव होना है, जिसके लिए बीजेपी उम्मीदवारों का ऐलान होना बाकी है. पहले चरण में उत्तर प्रदेश की भी 8 सीटें हैं. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अभी तक अपने कई उम्मीदवारों का ऐलान कर चुके हैं.
ठन भी दावा करते हैं कि वे अप्रवासियों और जातीय अल्पसंख्यकों द्वारा खड़ी की गई आर्थिक और सांस्कृतिक खतरों से अपनी आजीविका को संरक्षित करके औसत मेहनती यूरोपीय लोगों की रक्षा करने का प्रयास कर रहे हैं.
प्रो. चितामणी महापात्रा का कहना है कि आम तौर पर देखा गया है कि जब इन देशों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है तो इस तरह की घटनाएं नहीं होती. लेकिन ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता आने के साथ ही वैश्विक स्तर पर मंदी का दौर चल रहा है. इसलिए इस तरह के हमले का कारण सांस्कृतिक और आर्थिक अनिश्चितता हो सकता है.
यूरोप में कई घोर दक्षिणपंथी दलों ने अप्रवासी विरोधी और विशेष रूप से मुस्लिम-विरोधी जेनोफोबिया (विदेशी लोगों को नापसंद करना) को अपनी पार्टी के प्लेटफार्म पर नैतिक-राष्ट्रवाद की अवधारणा के माध्यम से प्रभावित किया है. इनका विचार है कि एक राष्ट्र को एक जातीयता से बनाया जाना चाहिए. ये दल बहुसंस्कृतिवाद को मूल राष्ट्रीय पहचान के विनाश के लिए एक कोड़ के रूप में देखते हैं.
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