अपने पति और बच्चे के साथ रहने वाली आसिया बीबी घर से निकलकर काम के लिए खेतों में गईं. लाहौर से दक्षिण पूर्व में क़रीब 40 मील दूरी पर उनका गांव इतानवाला काफी हरा भरा इलाक़ा है, जहां फलों के कई बगीचे हैं. ये पाकिस्तानी पंजाब के सबसे उपजाऊ इलाकों में एक है.
गांव की दूसरी महिलाओं की तरह आसिया इन बगीचों में काम करती थीं. वो जून का महीना था जब महिलाएं फालसा इकट्ठा करने के लिए खेतों में जमा हुई थीं. चिलचिलाती धूप में,कई घंटे काम करने के बाद थकी और प्यासी महिलाएं सुस्ताने के लिए थोड़ी देर बैठ गईं थी. किसी ने आसिया को नज़दीक के कुएं से पानी निकालकर लाने को कहा था.
उन्होंने पानी निकाला, जग में भरा और लाते वक्त प्यास के चलते उससे दो चार घूंट पानी पी लिया, इसके बाद उन्होंने जग मुस्लिम महिलाओं को थमाया. लेकिन वे सब इस बात से नाराज़ हो गईं.
आप भी सोच रहे होंगे, इसमें ऐसी कौन सी बात हो गई थी. दरअसल आसिया ईसाई हैं. पाकिस्तान में कई कट्टरपंथी मुसलमान दूसरी धार्मिक आस्था वाले के हाथों से खाना पीना पसंद नहीं करते हैं. वे मानते हैं कि जो मुसलमान नहीं हैं, वे अशुद्ध होते हैं.
साथ काम करने वाली महिलाओं ने आसिया से कहा कि तुम गंदी हो और तुम्हें उसी जग में पानी नहीं पीना चाहिए था. बात विवाद तक पहुंच गई, दोनों तरफ से कहासुनी भी हो गई.
पांच दिन बाद, आसिया के घर में जबरन पुलिस आ धमकी और कहा कि आसिया ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है. घर के बाहर गुस्साई भीड़ थी, जिसमें गांव के मौलवी भी शामिल थे. वे आसिया पर ईशनिंदा का आरोप लगा रहे थे. आसिया को जबर्दस्ती खींचकर बाहर निकाला गया.
गुस्से से तमतमाई भीड़ ने पुलिस के सामने ही आसिया को पीटना शुरू कर दिया. आसिया को गिरफ़्तार किया गया और उन पर ईशनिंदा का मुक़दमा चला. सुनवाई के दौरान आसिया खुद को निर्दोष बताती रहीं, लेकिन साल 2010 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. बीते नौ साल से वे जेल में एकांतवास या कहें काल कोठरी की सजा भुगत रहीं थीं.
पाकिस्तान में इस्लाम और पैगंबर के ख़िलाफ़ ईशनिंदा करने वालों को आजीवन कैद या फिर मौत की सजा दी जाती है. लेकिन कई बार ईशनिंदा के आरोप निजी खुन्नस निकालने के लिए लगाए जाते हैं. एक बार जिस किसी पर ईशनिंदा के आरोप लग जाते हैं तो सुनवाई शुरू होने से पहले ही उस पर और उसके परिवार वालों पर हमले शुरू हो जाते हैं.
मैं करीब साल भर पहले एक गोपनीय जगह पर आसिया के शौहर आशिक से मिली. आशिक और उनके बच्चे आसिया की गिरफ़्तारी के बाद इधर-उधर छिपकर रहने को मजबूर थे.
आशिक ने बताया, "अगर किसी क़रीबी की मौत हो जाए, तो कुछ दिनों में मरहम लग जाता है. लेकिन मां जीवित हो और उसे उसके बच्चों से अलग कर दिया जाए... जिस तरह से आसिया हम लोगों के बीच से ले जाई गईं थीं, तब दुख हद से गुजर जाता है."
पर्दे से घिरे बरामदे में बैठे आशिक खुद को संयत रखने की भरसक कोशिश करते हैं लेकिन कई बार उनका चेहरा गमगीन हो उठता है.
"हर पल डर में रह रहे हैं, सुरक्षा का डर हमेशा सताता है. हम लोगों के साथ कुछ भी हो सकता है. मैं बच्चों को केवल स्कूल भेजता हूं, घर के बाहर खेलने पर रोक लगी है, हम सबकी आज़ादी छिन चुकी है."
"असुरक्षा औरअनिश्चितता के कई साल बीतने के बाद भी आशिक ने आसिया को लेकर उम्मीद नहीं छोड़ी. मैंने अपनी आज़ादी खोई, मेरा घर और मेरी आजीविका सब छीन गई, लेकिन मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी. मैं आसिया की रिहाई के लिए कोशिश करता रहा."
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
مخضرما في صناعة الإعلام، وقد أصدر أكثر من كتاب يتضمن
وقد عَمَد كافيت إلى محاورة ضيوفه والانخراط في نقاشات صريحة معهم، بطئيس الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع الأمريكي، مايك بنس، بزيارة مست...
-
16वीं लोकसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने भारतीय राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया. समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिं...
-
Российский сенатор Алексей Пушков прокомментировал заявление президента Украины Владимира Зеленского. Ранее украинский лидер п редложил Рос...
-
وفي العالم العربي أطلق مستخدمو مواقع التواصل الاجتماعي وسم #فيروس_هانتا والذي كان من ضمن أكثر الوسوم انتشارًا في عدد من الدول منها: الجزائ...
No comments:
Post a Comment