लंबे समय से विवादों में घिरी गोविंदा की फिल्म "रंगीला राजा" के निर्माताओं के लिए राहत की खबर है. फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल (FCAT) ने 3 कट्स के साथ मूवी को U/A सर्टिफिकेट दे दिया है. बता दें कि रंगीला राजा के कई सीन्स पर CBFC ने आपत्ति जताई थी.
सेंसर बोर्ड ने फिल्म से डबल मीनिंग डायलॉग और गाली-गलौज भरे शब्दों को हटाने को कहा था. जिसकी वजह फिल्म के प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी और सेंसर बोर्ड की ठन गई थी. ये लड़ाई इतनी आगे जा पहुंची कि पहलाज निहलानी को बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था. आखिर में निहलानी की मशक्कत रंग लाई और ट्रिब्यूनल बोर्ड ने रंगीला राजा को 3 कट के साथ पास कर दिया है.
ट्रिब्यूनल बोर्ड (Film Certification Appellate Tribunal) ने फिल्म पर CBFC द्वारा लगाये गए 30 कट्स को हटाकर सिर्फ 3 कट्स लगाए गए. रंगीला राजा में गोविंदा बेहद अलग किरदार में नजर आएंगे. फिल्म 11 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
फिल्म को लेकर सेंसर के रवैये से पहलाज निहलानी और गोविंदा काफी नाराज थे. एक बयान में एक्टर ने कहा था, "मेरी फिल्में सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाती थीं. मेरी फिल्मों को पिछले 9 सालों से निशाना बनाया जा रहा है. मैं इस सब राजनीति से बाहर हूं. कुछ लोग हैं जो मुझे अभिनय करने के लिए जगह नहीं दे रहे हैं. मुझे समझ नहीं आता कि मैंने क्या गलती की है." निहलानी ने भी सेंसर पर गंभीर आरोप लगाए थे.
बाद में श्रीसंत दीपिका की दी हुई चीजों को वापस करने लगे. दीपिका ये रवैया देखकर हैरान-परेशान हो जाती हैं. वे श्रीसंत से बार-बार पूछती हैं कि वे ऐसा बिहेव क्यों कर रहे हैं? लेकिन एक्ट्रेस को कोई जवाब नहीं मिलता. इसके बाद दीपिका रोते हुए वॉशरूम में चली जाती हैं. फैंस को श्रीसंत को ये बचकाना एटिट्यूड पसंद नहीं आ रहा है. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने श्रीसंत के दीपिका संग बनाए भाई-बहन के रिश्ते को फर्जी तक बता दिया है.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है. इसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महासचिवों को बुलाया गया है. इस बैठक में जनवरी के दूसरे हफ़्ते में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के एजेंडे को लेकर चर्चा होगी. विधानसभा चुनाव में मिली हार और 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कैसे संगठन को तैयार करना है, स्थानीय मुद्दों पर पार्टी की रणनीति कैसे बनाई जाए इस पर चर्चा होगी.
केंद्र सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं को जल्द से जल्द जमीन पर पहुंचाया जाए इस पर भी चर्चा होगी. बीजेपी शासित राज्यों में सरकार और पार्टी के बीच समन्वय को कैसे बेहतर किया जाए इस पर भी जोर दिया जाएगा. बीजेपी शासित राज्यों में रिक्त सरकारी और राजनीतिक पदों पर पार्टी नेताओं की नियुक्तियां जल्द हों, इस पर भी विचार विमर्श किए जाने की संभावना है.
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