Tuesday, November 20, 2018

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का ऐलान- अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (66) ने अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। सुषमा ने मंगलवार को इंदौर में यह घोषणा की। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने के पीछे अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया है। सुषमा ने कहा कि इस तरह के फैसले पार्टी करती है, लेकिन मैंने अगला चुनाव नहीं लड़ने का मन बना लिया है। सुषमा मध्यप्रदेश के विदिशा से लोकसभा सदस्य हैं। वे देश की सबसे युवा विधायक और किसी राज्य की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं। 

सुषमा 2009 और 2014 में विदिशा से लोकसभा चुनाव जीतीं। 2014 में उन्होंने कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह को 4 लाख से ज्यादा वोट से हराया था। सुषमा ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। तब वे 25 साल की थीं। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं। उन्हें हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनाया गया। इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं।

1998 में दिल्ली की पहली महिला सीएम बनीं
नब्बे के दशक में सुषमा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं। अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने अटलजी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं।

1999 में बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया से हारीं
1996 में हुए लोकसभा चुनाव में सुषमा दक्षिण दिल्ली से सांसद बनी थीं। इसके बाद 13 दिन की अटलजी की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। मार्च 1998 में दूसरी बार अटलजी की सरकार बनने पर वे एक फिर से आईबी मिनिस्टर बनीं। 1999 में उन्होंने बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वे यहां हार गईं।

कांग्रेस के सामने दुविधा, राहुल को कैसे पेश करें- सुषमा
सुषमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा- कांग्रेस पार्टी के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि वह राहुल गांधी को जनता के सामने किस रूप में पेश करे। राहुल कभी मंदिर जाते हैं, तो कभी मानसरोवर चले जाते हैं। वे खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण कहते हैं। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार ने मप्र में विकास के कई कार्य किए हैं। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई विरोधी लहर नहीं है। सत्ता विरोधी लहर तब होती, जब सामने कोई बड़ा नेतृत्व होता है।

Sunday, November 18, 2018

'बेदाग नरेंद्र मोदी' बचेंगे ज़किया के 'सुप्रीम प्रहार' से?

गुजरात दंगे के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा.

ये याचिका कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़ाकिया जाफ़री ने दायर की है.

बीते मंगलवार को जस्टिस ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जाफ़री की याचिका सुनवाई के लिए मंज़ूर की थी.

कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की क्लोज़र रिपोर्ट के अध्ययन की ज़रूरत है, इसलिए 19 नवंबर को वो याचिका पर विचार करेगा.

ज़ाकिया जाफ़री ने एसआईटी के नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दिए जाने के गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है.

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 8 फ़रवरी 2012 को मामला बंद करने के लिए रिपोर्ट दाखिल की थी. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को क्लीनचिट देते हुए कहा था कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने योग्य कोई साक्ष्य नहीं हैं.

इसके साथ ही निचली अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर इन आरोपियों को क्लीनचिट दे दी थी.

इसके ख़िलाफ़ ज़ाकिया मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में गई थीं. वहां याचिका ख़ारिज होने के बाद ज़ाकिया जाफ़री गुजरात हाईकोर्ट गईं.

अक्तूबर 2017 में ज़ाकिया की याचिका हाईकोर्ट ने भी ख़ारिज कर दी.

जस्टिस सोनिया गोकानी ने दंगों में बड़ी साजिश के आरोपों को नकारते हुए कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर नहीं किया था.

जस्टिस सोनिया गोकानी ने कहा था, "संजीव भट्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही बड़ी साजिश पर चर्चा के बाद इसे ख़ारिज कर चुका है. मैं इस पर आगे नहीं जाना चाहती. बड़ी साजिश के आरोपों वाली याचिका ख़ारिज की जाती है."

हाईकोर्ट ने दंगों की दोबारा जांच करने से इंकार और इसमें किसी बड़ी साजिश के आरोप को रद्द करते हुए ज़ाकिया से कहा था कि वो चाहें तो सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती हैं.

ज़ाकिया सुप्रीम कोर्ट गईं और वहां उन्होंने याचिका दायर की.

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ज़ाकिया जाफ़री ने कहा कि गुजरात दंगों को आपराधिक साजिश मानते हुए 59 लोगों को फिर से अभियुक्त बनाकर नए सिरे से जांच के आदेश दिए जाएं.

2002 में गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 डिब्बे में लगी आग में कई कार सेवकों की मौत हुई थी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग लगाए गए डिब्बे में कुल 59 लोग मौजूद थे. इनेमें से ज़्यादातर वो लोग थे जो अयोध्या से लौट रहे थे.

Friday, November 16, 2018

शेयर बाजार में माहौल गिरावट का हो तो एसआईपी में निवेश बंद ना करें- ताहेर बादशाह

शेयर बाजार इन दिनों काफी उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं। इसलिए वित्तीय सलाहकार निवेशकों को उनकी जोखिम सहने की क्षमता के आधार पर ही निवेश की सलाह देते हैं। उनकी एक राय यह भी होती है कि निवेशकों को लंबे समय के लिए ही शेयर में पैसा लगाना चाहिए। बार-बार इस सलाह के बावजूद बाजार में जब भी अस्थिरता आती है, निवेशकों में घबराहट का माहौल बन जाता है। वे अपना पुराना निवेश बेचने लगते हैं। सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश बंद कर देते हैं। 

गिरावट के दौर को 'सेल' की तरह समझें

निवेशक ऐसे मौकों पर यह नहीं सोचते कि बिकवाली से उनका काल्पनिक (नोशनल) नुकसान वास्तविक में बदल जाता है। इसी तरह, गिरावट में एसआईपी बंद करने पर निचले स्तर पर निवेश का मौका हाथ से निकल जाता है। आम बाजारों में लगने वाली सेल से इसकी तुलना कर सकते हैं। वहां लोग कम कीमत पर क्वालिटी प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं। सेल धीरे-धीरे इतना लोकप्रिय हो गया है कि लोग पहले से लिस्ट बनाकर रखने लगे हैं कि क्या-क्या खरीदना है। अफसोस की बात है कि शेयर बाजार में लोग ऐसा नहीं सोचते। एक निवेशक ऊंची कीमत पर तो किसी कंपनी के शेयर खरीद लेता है। लेकिन जब उसकी कीमत घटती है तब पैसे लगाने से बचता है। आप तर्क दे सकते हैं कि निवेशक को यह कैसे पता चलेगा कि शेयर की कीमत कितनी गिरेगी। यहां इसी बात की चर्चा करते हैं।

तेजी और गिरावट बारी-बारी से आते रहते हैं

बाजार के लिए कोई भी टाइमिंग सटीक नहीं कही जा सकती है। बाजार की प्रकृति ही ऐसी है। यह चक्र में चलता है और इस दौरान ऊपर-नीचे होता रहता है। जब ऊपर का चक्र चल रहा हो सिर्फ उस समय निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन सच यही है कि ज्यादातर निवेशक निचले चक्र के आने का इंतजार नहीं करते। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बाजार में गिरावट का मतलब यह नहीं कि इक्विटी में निवेश के मौके खत्म हो गए हैं। शेयर बाजार के लिए एक बात निश्चित है कि गिरावट के हर चक्र के बाद देर-सबेर तेजी आती ही है, और हर तेजी के दौर के बाद गिरावट आती है। जो बात निश्चित नहीं वह यह कि तेजी या गिरावट का दौर कब आएगा और कितने दिन चलेगा।

एसआईपी में निवेश से एवरेजिंग होगी

इसलिए सबसे आदर्श तरीका यह है कि गिरावट और तेजी, हर दौर में निवेश करते रहिए। तेजी में आपने ऊंची कीमतों पर निवेश किया है तो गिरावट में कम कीमतों पर निवेश करके औसत लागत घटा सकते हैं। यहां एसआईपी सबसे ज्यादा काम आते हैं। अगर आप एसआईपी के जरिए बाजार में निवेश कर रहे हैं तो एवरेजिंग होती रहेगी। यही कारण है कि सलाहकार गिरावट के माहौल में एसआईपी में निवेश जारी रखने की सलाह देते हैं। जब बाजार निचले स्तर पर होगा तभी पैसे और निवेश की उचित वैल्यू मिलेगी। 

एसेट एलोकेशन की महत्वपूर्ण भूमिका

निवेशकों को याद रखना चाहिए कि कोई भी निवेश लांग टर्म के आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसमें एसेट एलोकेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। निवेशकों को वित्तीय सलाहकार से बात करके यह समझना चाहिए कि अलग बाजार परिस्थितियों में इक्विटी में कितना निवेश करें। फिर उसी के अनुरूप पैसे लगाने चाहिए ताकि निवेश पर उन्हें ज्यादा लाभ मिल सके।

مخضرما في صناعة الإعلام، وقد أصدر أكثر من كتاب يتضمن

وقد عَمَد كافيت إلى محاورة ضيوفه والانخراط في نقاشات صريحة معهم، بطئيس الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع الأمريكي، مايك بنس، بزيارة مست...